सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

Hindi Kahaniya लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अकलमंद किसान

  Hindi kahaniya एक गांव में गोपाल नाम का किसान रहता था। परिवार में  उसकी पत्नी और 2 बच्चे यही उसका संसार था। गुजारा करने के लिए वह अपने छोटे से खेत में फसलें उगाता था  और उन्हें बेच कर अपना और अपने परिवार के लिए दो वक्त का खाना जुटा पाता था। कहने को उसके पास इतना धन नहीं था लेकिन फिर भी वह काफी खुश था। एक दिन दोपहर को वह अपनी पत्नी के साथ खेत पर खड़े होकर कह रहा था," हे भगवान‌ ! अगर बारिश हो जाए तो इस बार सभी किसानों की फसलें अच्छी हो जाए। "  उसकी पत्नी भी कहती है," हां ! सही कहा आपने। अगर बारिश हो जाती है तो इस बार काफी अनाज हम किसानों के पास आ जाएगा। " बारिश की आस में किसानों की उम्मीदें टूटने लगती हैं लेकिन बारिश की एक भी बूंद जमीन पर नहीं गिरती। परिणाम यह होता है कि सभी किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं और सूखने लगती हैं। गोपाल की फसल भी पूरी तरह बेकार हो जाती है।  ये देखकर गोपाल कहता है," हे भगवान ! इस बार किसानों का बहुत नुकसान हुआ है। फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। मैंने तो इस फसल और बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्जा भी ले रखा था। अब मैं इस कर्जे को कैसे...

मोची की कड़ी मेहनत और अच्छे इरादे

  चैनपुर गांव का एक भोला भाला गरीब लेकिन हुनरमंद मोची था। वह अपनी पत्नी कलावती और बेटे कालू के साथ रहा करता था और मोची का काम किया करता था।  लेकिन गांव में भी मॉडर्न चप्पल जूते आ जाने के कारण उसका धंधा बंद होने के कगार पर था। क्योंकि आजकल लोग नए नए डिजाइन के जूते व चप्पल पहन null ते थे और हाथ से बनाई हुई चप्पल उन्हें पसंद नहीं आती थी।  ऐसे ही एक दिन कलावती सुंदर से कहती है।  कलावती," सुन रहे हो जी... कालू ने कल से कुछ खाया नहीं है। सूखकर कांटा हो गया है। घर में कुछ खाने को नहीं है। " सुन्दर," तो इसमें पूछना क्या था ? साहब जी की दुकान से कुछ ले जाती खाने के लिए। " कलावती," कल साहब जी की दुकान पर गई थी आटा लाने, लेकिन दुकानदार ने साफ मना कर दिया। बोला कि पहले का हिसाब चुकता करो, उसके बाद राशन मिलेगा। " सुन्दर," बात तो सही कह रहा है। साहब जी का बकाया ज्यादा हो भी गया है। पर क्या करें ?  कोई कस्टमर आता ही नहीं है। दुकान पर। सब बगल के बाजार में खुले मॉल से मशीन से बने जूते ले आते है। " कलावती," तो शहर में जाकर ही कुछ काम क्यों नहीं करते ? शहर में...